News Ticker

Menu

नारी सशक्तीकरण से देश के अर्थशास्त्र के ध्वस्तीकरण तक : संजीव सिंह






ON GDP
आप नेता संजीव सिंह




" या देवी सर्वभुतेषू शक्ति रूपेण संस्थिता,नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः " की परम्परा से शारदीय नवरात्रि का पारण करने वाले समाज में पहले ही दिन बी एच यू एकबार फिर उखड़ गया जब एक छात्रा के साथ कैम्पस में ही शाम छः बजे कुछ अवांछनीय तत्वों ने उसके साथ बुरी तरह से छेड़खानी एवं हाथापाई की जहां विश्वविद्यालय सुरक्षा के नाम पर 15 करोड़/वर्ष खर्च करता है उसकी सुरक्षा नहीं कर पाया बल्कि यह कहा जाता है " केवल छुआ " तो है उसके बाद महिला वार्डेन कहती है "शाम छः बजे जाओगी तो ऐसा ही होगा " इसके बाद प्राक्टोरीयल बोर्ड भी कहता है फटकार लगाता है सवाल उठा योगी सरकार के " एंटी रोमियो स्क्वैड " पर भी कि वह कहाँ दफन हो चुकी है व्यवस्था। 








पीड़ित छात्रा और उसके साथियों ने न्याय के लिये सड़क पर बैठने के लिये मजबूर हो गयी धीरे-धीरे एक छोटी प्रशासनिक भूल आन्दोलित हो चुकी थी जिसकी पूरी बागडोर छात्राओं ने अपने हाथ में ले रखा था विश्वविद्यालय के छात्र भी उनके लड़ाई में पीछे खड़े होकर सहयोग करने लगे लेकिन विश्वविद्यालय ने अपनी हठधर्मिता से समझौता नहीं किया।आन्दोलित छात्राओं की माँग दोषियों की गिरफ्तारी,सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना,सी सी टीवी कैमरे का प्रबंध तथा समय ,भोजन इत्यादि की उन पर पाबंदी से मुक्त रखा जाय को लेकर था चूँकि किसी भी  विश्वविद्यालय का कुलपति वहां के छात्रों का अभिभावक होता है जो उसके सुख दुःख में खड़ा होता है लेकिन वर्तमान कुलपति ड़ा गिरीश चन्द्र त्रिपाठी का अंहकार और झूठे  हठ ने सिर्फ बनारस नहीं बल्कि पूरे देश को आक्रोशित कर दिया।







BHU छात्रों पर पुलिस कार्यवाही 



बात इतनी सी नहीं क्योंकि आन्दोलन के समय देश के प्रधानमंत्री जो स्थानीय सासंद भी है उनके समेत मुख्यमंत्री,राज्यपाल भी 22 घंटे मौजूदगी रही आन्दोलन के चलते दुर्गा मंदिर दर्शन के लिये जाते प्रधानमंत्री के यात्रा मार्ग परिवर्तन कर दिया गया फिर भी दो रात से न्याय की आश लिये बैठी इन दुर्गा, सरस्वती,लक्ष्मी से  मिलना तो दूर कुछ बोलना ठीक नहीं समझा। जबकि ये वही बी एच यू है जहाँ एक बार भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के आगमन पर कुछ छात्रों ने उन्हें नयी शिक्षा नीति को लेकर काला झंडा दिखाने की ठानी थी। श्रीमती गांधी को मालूम चला तो उन्हे मिलने का निमंत्रण भिजवायें तब भी छात्रों ने कहा मिलने के बाद काला झंडा दिखायेगे तब भी वो मिलीं और छात्र इस तरह मंत्र मुग्ध हुए की उनके साथ हो लियें ये होता है बड़े पद का बडप्पन। लेकिन इस बार संवेदनहीनता केवल कुलपति नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बनी रही फिर क्या इन दोनों प्रमुख व्यक्तित्व की चुप्पी ने कुलपति को मौका दिया तथा इनके जाने के बाद जो बी एच यू के इतिहास में कभी नहीं हुआ था। 








वह घटना घटित हुई कि छात्राओं के छात्रावास में घुसकर उन्हें पुरूष पुलिस कर्मियों द्वारा बुरी तरह बर्बरता से लाठीचार्ज द्वारा मारा पीटा गया तथा आधी रात छात्रावास से खदेड़ा गया जिसमें एक मीडिया के ब्यूरो चीफ को भी इतना पीटा गया कि उनका हाथ टूट गया। फिर तो पूरे देश में आन्दोलन की आग फैल गई ।सवाल ये बनता है क्या इसके लिए दोषी उन जिम्मेदार तथा संवेदनहीन लोगों को कड़ी सजा क्या इन जाँच समिति के द्वारा मिल पायेगी ? या पढ़े बेटियाँ बढ़े बेटियाँ का नारा देने वाली सरकार इसी तरह बेटियों के आवाज को चुप कराती रहेगी।  क्योंकि जब " बचेगी बेटियाँ तब पढ भी लेगी और बढ़ भी लेंगी "  इन छात्रों का न्याय भविष्य के गर्भ में पल रहा है देखना होगा हल कैसे होता है। 








वही सरकार की नीतियों को कहें या नियत को जब, घर की लक्ष्मी के साथ बुरा व्यवहार होगा तो देश की लक्ष्मी अर्थात अर्थशास्त्र में भी गिरावट इतना आ चुका है कि देश आर्थिक मंदी के चौखट पर आ चुका है। हो भी क्यों नहीं एक ऐसी सरकार जो कहने के लिये गरीबों को समर्पित है लेकिन देखा जाये तो साढ़े तीन वर्षों में मोदी सरकार का समर्पण चुनिन्दा बड़े पूँजीपति घरानों के प्रति दिखा जहाँ आज जी डी पी के आँकड़े स्वयं दर्शा रहें है। 
Growth Rate 


जिस पर खुद भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व वित्त मंत्री श्री यशवंत सिन्हा के बयान पर्याप्त है उनका मानना तो जी डी पी के सही फार्मूले से देखा जाय तो 5.7 से  3.7 हो सकती है। क्योंकि यही बात रातों रात तानाशाही से लिये गये " नोटबंदी " के फैसले पर देश विदेश के अर्थशास्त्रियों ने गलत ठहराया था लेकिन प्रधान सेवक 50 दिन बाद गलती के लिये किसी चौराहे पर आकर सजा भुगतने को कहा था लेकिन चौराहे चौराहे बैंक के लम्बे कतारों में अपने पैसों को सजा स्वरुप पाने में सवा सौ लोग मर गयें फिर भी सरकार कहती रही नोटबंदी सफल रही।जबकि देश में कालाधन बता पाने में सरकार असफल रही जिसको लेकर प्रधानमंत्री जी के 15 अगस्त  लाल किले के भाषण से हताशा और झूठ के स्वर अच्छी तरह दिखाई दिये।







नोटबंदी से नहीं आतंकवाद,कालाधन, महंगाई,रोजगार किसी भी जगह राहत नहीं मिली फिर भी धीरे-धीरे लोग संभलते तभी कोढ़ में खाज का काम बेमन तथा अधूरी तैयारी के साथ फिर आधी रात को अर्थ व्यवस्था चौपट करने के लिये धूम धाम से जी एस टी लागू कर दिया जिसका असर साफ दिख रहा है। कि बाजार से माँग और आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है, लघु उद्योग बर्बादी के कगार पर है,निवेश न्यूनतम स्तर पर है,निर्माण के क्षेत्र में जहाँ अधिकतम रोजगार श्रीजन होता था वहां अधिकतम कटौती हो रही है,किसानों की हालात जहाँ पहले से कमजोर थी वह अब आत्महत्याओ के दौर से भी भयावह स्थिति दिखाई दे रही क्योंकि कर्जमाफी तत्काल तो थोड़ी राहत दे सकतीं है लेकिन दूरगामी इलाज नहीं दिखता। बैंको की गिरती साख क्योंकि जहाँ एक तरफ मोदी सरकार काले धन से 15-15 लाख एक एक व्यक्ति को देने की बात करती थी और नोटबंदी से सपना अमीरों की नींद गायब होने का दिखाया था पर गरीबों की नींद उड़ गयी है पाँच हज़ार से कम बेलेंस रखने वाले खातों से 250 करोड़ से ज्यादा रुपया बैंको ने अपने पास जमा कर लिय



Share This:

Daily Window

We have every right to tell the truth in our way. It can have different colors, different languages and democratic . But we as the citizens have every right to know the truth. We either read or listen paid news in different forms or we as reader or viewer is the victim of private treaties done by corporate media.

No Comment to " नारी सशक्तीकरण से देश के अर्थशास्त्र के ध्वस्तीकरण तक : संजीव सिंह "

Thanks For Visiting and Read Blog

  • To add an Emoticons Show Icons