रावण बनना भी कहां आसान : अरविन्द केजरीवाल





Delhi CM
दिल्ली मुख्य मंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल 



सदियों से हम लोग दुर्गा पूजा दसहरा का त्यौहार हर्षोउल्लास से मनाते आ रहे है लेकिन क्या इसका असर हमारे असल जिंदगी में होता है। सायद नहीं। " अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय, पाप पर पुण्य की विजय, अत्याचार पर सदाचार की विजय, क्रोध पर दया, क्षमा की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय " इन सुन्दर पक्तियो को भी सदियों से दशहरा के मौके पर दोहराते आ रहे है। फिर भी समाज में बुराई बढ़ती जा रही है। रावण पर श्रीराम की विजय के प्रतीक पावन पर्व विजयादशमी के महत्व को समझना नहीं चाहते। इसी मौके पर दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल अपने फेसबुक पेज पर एक सन्देश लिखा है। 








     " रावण बनना भी कहां आसान " 
रावण में अहंकार था, तो पश्चाताप भी था
रावण में वासना थी, तो संयम भी था
रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी
तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था
सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी
पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी
राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था 
दस के दस चेहरे, सब "बाहर" रखता था
महसूस किया है कभी
उस जलते हुए रावण का दुःख 
जो सामने खड़ी भीड़ से
बारबार पूछ रहा था
" तुम में से कोई राम है क्या ? "









दुर्गा पूजा के अवसर पर दिल्ली के कई पंडालों में जाकर केजरीवाल ने लोगो को नवरात्री और दशहरे की  बधाई दिया। सीएम ने माँ दुर्गा का पूजा कर आर्शीवाद लिया। एक पंडाल में मुख्यमंत्री केजरीवाल भाई चारे का गीत "इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा, यही पैगाम हमारा" गाकर लोगो को सम्बोधित किया। साथ में दिल्ली के MLA श्री शौरभ भरद्वाज और कई पदाधिकारी भी मौजूद थे। 



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