News Ticker

Menu

पप्पू और गप्पू दोनों ही गलत : डॉ. वेदप्रताप वैदिक


Gappu and Pappu
राहुल गाँधी और पीएम नरेंद्र मोदी 


वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने अपने फेसबुक और वेबसाइड पर लिखा है कि पप्पू और गप्पू दोनों ही गलत, भाजपा को चुनाव आयोग का यह निर्देश ठीक है कि राहुल गांधी को वह ‘पप्पू’ न कहे। गुजरात के चुनावों के लिए तैयार की गई चुनाव सामग्री में राहुल के लिए ‘पप्पू’ की जगह अब युवराज शब्द का प्रयोग होगा। वैसे तो पप्पू शब्द अपने आप में बुरा नहीं है, अपमानजनक नहीं है, अश्लील नहीं है। लोग प्रायः अपने बेटे को ही प्यार से पप्पू कहते हैं या कोई बहुत भोला-सा बच्चा हो तो लोग उसे पप्पू कह देते हैं। इसमें तो शक नहीं कि राहुल गांधी हमारे अन्य नेताओं की तुलना में काफी भोले हैं। वे जैसी भाषा बोलते हैं, वह बच्चों-जैसी ही होती है। 




उसमें कोई गुरु-गंभीर शब्द नहीं होते। कोई गहरा विश्लेषण नहीं होता। जैसी उनकी हिंदी होती है, वैसी ही अंग्रेजी होती है। उनके वाक्य बहुत लंबे और उलझे हुए नहीं होते। वे व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध हों, यह भी जरुरी नहीं होता। बस वे सहज होते हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे कि किसी बेपढ़े- लिखे साधु के होते हैं। उनमें पंडिताई नहीं होती। चालाकी नहीं होती। चतुराई भी नहीं होती। यही राहुल का भोलापन है, जिस पर कांग्रेसी कुरबान हो जाते हैं। इसी भोलेपन को कांग्रेस-विरोधी लोग पप्पूपना कहते हैं। राजनीति अक्सर काफी खुर्राट, खूंखार, चतुर, चालाक और धूर्त्त लोगों से भरी होती है।



इस दृष्टि से राहुल गांधी एक तरफ हैं और दूसरी तरफ हैं- नरेंद्र मोदी। लेकिन मोदी पर नेताओं के ये सारे विशेषण लागू नहीं होते। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तपस्वी और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद आजकल लोगों ने राहुल की तरह उनको भी एक उपाधि दे दी है। यदि राहुल को वे ‘पप्पू’ कहते हैं तो मोदी को वे ‘गप्पू’ कहते हैं। याने कोरे गप्पे हांकनेवाला! बंडिया बदल - बदलकर बंडल मारनेवाला !! पूरी सरकार की तरफ से यदि एक ही बोलनेवाला हो तो यह स्वाभाविक है कि वह जरुरत से ज्यादा बोलता हुआ दिखाई पड़ेगा। 




अच्छा हुआ कि कांग्रेसियों ने अपने पोस्टरों में मोदी को ‘गप्पू’ नहीं कहा। वरना, चुनाव आयोग उन्हें भी मना करता लेकिन चुनाव-सामग्री की पहुंच तो बहुत कम होती है। सोश्यल मीडिया पर मोदी के लिए क्या-क्या नहीं कहा जा रहा है ? उसे कोई कैसे रोकेगा ? चुनाव सामग्री में से पप्पू और गप्पू जैसे शब्दों का न जाना बेहतर ही है।

Share This:

Daily Window

We have every right to tell the truth in our way. It can have different colors, different languages and democratic . But we as the citizens have every right to know the truth. We either read or listen paid news in different forms or we as reader or viewer is the victim of private treaties done by corporate media.

No Comment to " पप्पू और गप्पू दोनों ही गलत : डॉ. वेदप्रताप वैदिक "

Thanks For Visiting and Read Blog

  • To add an Emoticons Show Icons