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आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता निरस्त करने की आयोग की सिफारिश अलोकतांत्रिक : विपक्ष




लाभ के पद को लेकर आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता पर चुनाव आयोग के फैसले पर विपक्ष AAP के समर्थन में एकजुट होता दिख रहा है। पहले तृणमूल कांग्रेस, फिर CPIM के समर्थन के बाद अब शरद यादव ने AAP का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की सिफारिश को अलोकतांत्रिक बताया है। चुनाव आयोग पर उठ रहे सवाल पर शिव सेना के नेता संजय राउत ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला सवालों के घेरे में है। ऐसे फैसले दिए जाने पर चुनाव आयोग से सवाल होना सामान्य है।  इसके लिए खुद आयोग जिम्मेदार है। 


इसी मुद्दे पर नितीश कुमार से अलग हुए शरद यादव ने ट्वीट किया  कि ' AAP विधायकों की सदस्यता रद्द करना अलोकतांत्रिक है, क्योंकि उनका पक्ष सुना ही नहीं गया है, ये न्याय के खिलाफ है। आजकल देश की संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। लोगों से अपील है कि वे इस पर गहनता से विचार करें, देश का भविष्य किनके हाथों में सुरक्षित है '



तृणमूल कांग्रेस का आम आदमी पार्टी को समर्थन 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि राजनीतिक बदले के लिए संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ममता ने कहा, ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधायकों को चुनाव आयोग की ओर से अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। हम ऐसे वक्त में उनकी पार्टी AAP व केजरीवाल टीम के साथ है। 





माकपा का AAP को स्पोर्ट 

माकपा की वृंदा करात ने कहा कि आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता के खिलाफ चुनाव आयोग का फैसला अलोकतांत्रिक है। इससे स्वायत्त, स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के तौर पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता नहीं बढ़ेगी।  वृंदा करात ने कहा, 'हम चुनाव आयोग के इस फैसले का विरोध करते हैं। 


आयोग की निष्पक्षता संदेह के घेरे में है। यह जनतंत्र के लिए खतरे की घंटी है : माकपा

सी.पी.आई.(एम) ने कहा दिल्ली राज्य कमेटी विभिन्न राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनतंत्र की रक्षा के लिए इस तरह के संवैधानिक मसलों पर देशभर में एक जैसा कानून बने इसके लिए प्रयास करने की अपील करता है।साथ ही चुनाव आयोग से मांग करती है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण फैसले को तुरंत वापस लें।


गुजरात चुनाव की घोषणा में देर करना हो या लाभ के पद पर आप विधायकों के अयोग्यता का अभी लिया गया यह फैसला हो - आयोग की निष्पक्षता संदेह के घेरे में है। यह जनतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद के मामले में अयोग्य घोषित करने की चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति को की गई सिफारिश दुर्भाग्यपूर्ण है। आप विधायकों को सुने बिना लिए गए इस फैसले की सी.पी.आई.(एम) दिल्ली राज्य कमेटी कड़ी निंदा करती है।

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