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700 स्टेशनों पर 80 लाख यात्रियों को फ्री वाई फाई तो कुछ भी नहीं है गोयल जी - रवीश कुमार

700 स्टेशनों पर 80 लाख यात्रियों को फ्री वाई फाई तो कुछ भी नहीं है गोयल जी - रवीश कुमार
700 स्टेशनों पर 80 लाख यात्रियों को फ्री वाई फाई तो कुछ भी नहीं है गोयल जी - रवीश कुमार 



22 जून को इकनोमिक टाइम्स में ख़बर छपती है और उसे 23 जून को प्रधानमंत्री मोदी ट्विट करते हैं कि देश के 700 स्टेशनों पर एक महीने में 80 लाख लोगों को वाई फाई की सुविधा दी जा रही है। अंग्रेज़ी में इस संख्या को 8 million लिखा है जिसे पहली नज़र में देखते ही लगेगा कि बड़ी भारी कामयाबी है। एक महीने में 80 लाख लोगों को वाई फाई सुविधा की पेशकश।


देश में करीब 7000 स्टेशन हैं, इनमें से चार साल बाद सरकार बताती है कि 700 स्टेशन पर 80 लाख लोगों को वाई फाई सुविधा मिल रही है। इस लिहाज़ से ये बड़ी कामयाबी है या छोटी, बेहतर है आप अपनी आंखों का कुछ इस्तमाल करें।

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अब अगर आप यात्रियों के हिसाब से देखें तो यह कामयाबी कुछ भी नहीं है। हर दिन दो करोड़ तीस लाख यात्री रेल से सफ़र करते हैं। इस हिसाब से महीने में करीब 69 करोड़ यात्री सफर करते हैं। 69 करोड़ यात्रियों में से आप एक महीने में मात्र 80 लाख यात्रियों को मुफ्त वाई फाई की सुविधा दे रहे हैं तो कौन सा बड़ा तीर मार लिया आपने। ये तो एक प्रतिशत के आस पास ही है। भारतीय रेल के करोड़ों यात्रियों में से एक प्रतिशत को मुफ्त वाई फाई की सुविधा देने की खबर को प्रधानमंत्री ट्विट कर रहे हैं।


अब फिर से स्टेशन के हिसाब से देखते हैं। 700 स्टेशनों में मुंबई, हावड़ा और दिल्ली के स्टेशन तो आने ही चाहिए। हावड़ा स्टेशन पर नौ लाख यात्री प्रतिदिन आते जाते हैं। इस हिसाब से महीने में 2 करोड़ 70 लाख यात्री हुए। नई दिल्ली स्टेशन पर प्रतिदिन आने जाने वाले यात्रियों की संख्या करीब 5 लाख बताई जाती है। इस हिसाब से महीने में डेढ़ करोड़ यात्री हुए। मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हर दिन औसतन 20 लाख से यात्रियों की आवाजाही होती है। इस हिसाब से महीने में यात्रियों की संख्या 6 करोड़ से अधिक होती है।

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सिर्फ मुंबई, कोलकाता, दिल्ली के स्टेशनों पर एक महीने में आने जाने वाले यात्रियों की कुल संख्या जोड़ ले तो यह 10 करोड़ से ज्यादा होती है। क्या 10 करोड़ यात्रियों के बीच 80 लाख यात्रियों को फ्री वाई फाई की सुविधा देने का इंतज़ाम कोई बहुत बड़ी उपलब्धि है? मेरे हिसाब से कुछ भी नहीं है।

मगर सरकार आंकड़ों की बाज़ीगरी में एक्सपर्ट हो गई है। इतनी बाज़ीगरी होती है कि सामान्य दिमाग़ के लिए न तो इसे पकड़ना मुमकिन है और न ही वक्त है। कमाल ये है कि प्रधानमंत्री ट्विट कर सामने से बता रहे हैं कि चार साल के डिजिटल इंडिया के यही रिज़ल्ट है कि हम एक प्रतिशत यात्रियों को ही मुफ्त वाई फाई दे पा रहे हैं मगर हमें दिखाई दे रहा है कि बड़ा भारी तीर मार लिया गया है।

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आप भी अपनी तरफ से रिसर्च कीजिए। हमारे हिसाब में कमी हो तो बताइये मगर जो लिखा है उसी पर बात कीजिए।

रवीश कुमार 
वरिष्ठ पत्रकार 

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