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CTN यानि CLEAN THE NATION ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE - Ravish Kumar


रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार 


CLEAN THE NATION


नाज़ी दौर के इतिहास को पलटिए आपको एक शब्द मिलेगा cleansing जिसे यहूदियों की सफाई के संदर्भ में इस्तमाल किया जाता था। उनकी बस्तियों की cleansing से लेकर नस्ल की cleansing तक का संदर्भ आपको जगह-जगह मिलेगा। आबादी के एक हिस्से को मिटा देने को cleansing कहते हैं।






जार्ज ऑरवेल की एक किताब है 1984। उसका कोई भी पन्ना आप पढ़ लें। एक Thought police का ज़िक्र आता है। विचार पुलिस कह सकते हैं। ऑरवेल इस संस्था की कल्पना कर रहे हैं जो हर नागरिक के मन में उभर रहे विचार को जान लेती है। नज़र रखती है। कोई भी नागरिक पार्टी के ख़िलाफ़ सोच नहीं सकता है। लिख नहीं सकता है। बोल नहीं सकता है। जगह-जगह माइक्रोफोन लगे हैं। टेलिस्क्रीन लगा है जिसके पीछे से कोई आपको देख रहा है। कोई आपको सुन रहा है। विचार पुलिस नहीं चाहती कि एक नागरिक या इंसान के तौर पर आपके भीतर किसी प्रकार की कोई भी भावना ज़िंदा रहे। भले ही वह भावना अतिरिक्त ख़ुशी की क्यों न हो। भावनाओं पर भी पार्टी का नियंत्रण है। 1984 किताब 1949 में छपी थी। इन दिनों अमरीका मे यह किताब फिर से पढ़ी जाने लगी है। आज के वक्त को आख़िर कैसे इस शख़्स ने साफ़ साफ़ देख लिया था। हमारे लिए लिख दिया था। दुनिया तब भी बेख़बर रही। आज भी बेख़बर है।




CTN- Clean The Nation 2019 में बनी है। भारत में बनी है। पुलवामा हमले के अगले दिन 9 नौजवान फेसबुक पर इस नाम से एक ग्रुप बनाते हैं। इससे जुड़े लोग पुलवामा हमले पर सवाल उठाने वालों की पहचान करते हैं। उनके ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत करते हैं। उन्हें ट्रोल किया जाता है। वे गिरफ्तार होते हैं। निलंबित होते हैं।



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इसके 4500 सदस्य बन जाते हैं। फेसबुक और ट्विटर ने इनके हैंडल को कैंसल कर दिया फिर भी फेसबुक पर इनका छद्म ग्रुप चलता रहा। जिसके 40 एडमिनिस्ट्रेटर थे। ज्यादातर की उम्र 20 साल के आस-पास है। ये लोग नोएडा और दिल्ली में आईटी प्रोफेशनल के रूप में काम भी करते हैं।




एक वीडियो जारी होता है। इसके सदस्य मधुर सिंह कहते हैं कि भारतीय सेना लिखा हुआ टी-शर्ट पहनो। उन लोगों का पता करो जो भारतीय सेना पर हंस रहे हैं। उनके मालिकों से संपर्क करो। जहां पढ़ रहे हैं उन यूनिवर्सिटी से संपर्क करो। उन्हें सबक सीखा दो। नौकरी से निकलवा दो। यूनिवर्सिटी से निलंबित करवा दो।



इंडियन एक्सप्रेस ने मधुर सिंह से भी बात की है। इसके कोर सदस्यों से बात कर लिखा है कि यह समूह दावा करता है कि भारत विरोधी लोगों के ख़िलाफ़ 45 प्रकार की कार्रवाई करवाई गई।






गुवाहाटी के एक कालेज का सहायक प्रोफेसर निलंबित होता है। राजस्थान विश्वविद्यालय 4 कश्मीरी छात्राओं को निलंबित करता है। एक ट्विटर पोस्ट के कारण जयपुर में गिरफ्तारी होती है। ग्रेट नोएडा का इंजीनियरिंग कालेज कश्मीरी छात्र को निलंबित करता है। बिहार के कटिहार में एक छात्र फेसबुक पोस्ट के कारण गिरफ्तार होता है। कई संस्थाओं ने CTN को कार्यवाई का पत्र दिया है।


CTN को पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पत्रकारिता के लिए पुरस्कार दिया जाता है। इस पुरस्कार का नाम है सोशल मीडिया पत्रकारिता नारद सम्मान। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मनमोहन वैद्य हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी हैं। पुरस्कार देने वाली संस्था का नाम है इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र(IVSK)। यह आयोजन होता है दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में है।



इंडियन एक्सप्रेस ने अवार्ड देने वाली संस्था के सचिव वागीश इस्सर से बात की है। उनका कहना है कि “इस समूह को अवार्ड इसलिए दिया गया क्योंकि हमने देखा कि ये अपने देश को बहुत प्यार करते हैं। बहुत लोग देश को प्यार करते हैं लेकिन कुछ लोग ज़्यादा सक्रियता से प्यार करते हैं।”





गुवाहाटी की सहायक प्रोफेसर ने कहा है कि मीडिया पीछा करने लगा। घर छोड़ कर भागना पड़ा। महीने भर बाद लौटी लेकिन निलंबन पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। वापस नहीं लिया गया है। जयपुर में चार कश्मीरी लड़कियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया। उनके व्हाट्स एप मेसेज का मतलब निकाला गया कि इन लोगों ने पुलवामा हमले पर खुशी ज़ाहिर की है। उन्हें कालेज और हास्ट से निलंबित कर दिया गया। स्थानीय लोग भी इनके खिलाफ प्रदर्शन करने आ गए। एफ आई आर दर्ज हुई मगर कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। एक्सप्रेस ने थाने के एस एच ओ से बात की है। बताया है कि हमने मामले की जांच की और निष्कर्ष यही निकला है कि कोई अपराध नहीं किया गया है। लड़कियों के ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं बनता है। कोर्ट में जवाब सौंप दिया गया है।



ज़रूर इन बातों से स्थानीय स्तर पर मोहल्लों में बहस हुई होगी। लोगों को फर्ज़ी सूचनाओं के आधार पर राष्ट्रवादी बनाया गया होगा। मीडिया में बहस हुई होगी। अब यह मामला समाप्त हो चुका है। न समाज को अफ़सोस है और न मीडिया को।




जगह-जगह इसी पैर्टन पर बहस के मुद्दे पैदा किए जाते हैं। लोगों के बीच से राष्ट्रविरोधी की पहचान की जाती है। मामला बनता है और दूसरे मुद्दों से लोगों को भटका दिया जाता है। हर दिन लोग इसी तरह से ड्रिल कर रहे हैं। वे जार्ज ऑरवेल के 1984 के नागरिक बन गए हैं। उनकी अपनी कोई सोच नहीं बची है। कोई समझ नहीं बची है। वे अब अपनी हंसी भी नहीं हंस सकते हैं। जब नेता कहेगा और जितना नेता हंसेगा उतना ही हंसना होगा।




ऐसी कई पुलिस आपके आस-पास है। नहीं भी है तो उसके आ जाने का डर लगा रहता है। इसलिए आप खुलकर लिखने से डरते हैं। खुलकर बोलने से बचते हैं। ट्रोल के हमले से घबराते हैं। क्योंकि आप पर CTN-CLEAN THE NATION जैसी संस्थाओं की नज़र है। BIG BROTHER IS WATCHING YOU.





जॉर्ज ऑरवेल की रचना 1984 ज़मीन पर उतर चुकी है। CTN बिग ब्रदर का सीसीटीवी कैमरा है। स्वागत है ये सब आज का भारत है। इतिहास के पुराने माल को नया बताकर बेचा जा रहा है। आप अब नागरिक नहीं रहे। आप पार्टी हो गए हैं।

रवीश कुमार 

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