बीजेपी ने नोटबंदी से पहले करोड़ों की जमीन खरीदने के मामले में घिरी

BJP कार्यालय जमीन खरीद मामला : JDU और RJD ने पूछे तीखे सवाल

PM Narendra Modi 











बीजेपी द्वारा बिहार के अलग-अलग जिलों में खरीदी गई करोड़ों रुपये की संपत्ति के मामले में RJD और JDU ने शुक्रवार को मामले में जांच की मांग की है दोनों पार्टियों का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के पुराने नोटों पर बैन लगाने से कुछ हफ्तों पहले ही ये जमीनें खरीदी गईं है  इस मामले न्यायिक जांच के साथ-साथ जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी द्वारा पूछताछ की मांग की। पार्टी ने संदेह जताया है कि मामला ब्लैक मनी से जुड़ा हुआ है।







राज्य के 22 जिलों में भाजपा द्वारा अपने कार्यालयों के लिए  खरीदी गयी जमीन को लेकर शुक्रवार को एक लोकल न्यूज चैनल पर खबर दिखाये जाने के बाद सूबे की राजनीति गरमा गयी है. जदयू ने इस पर सवाल उठाते हुए भाजपा से सफाई मांगी है. वहीं, भाजपा ने जदयू की मांग को ठुकराते हुए कहा है कि उसे क्यों हिसाब दे. यह मामला एेसे समय आया है, जब नोटबंदी को लेकर देश में सियासी तूफान मचा हुआ है. नीतीश कुमार द्वारा  नोटबंदी का समर्थन किये जाने के बीच उनकी पार्टी ने भाजपा से पूछा है कि इसके लिए पैसा कहां से आया? जो जमीन खरीदी गयी, उसका भुगतान चेक से हुआ या  कैश से? जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, प्रवक्ता नीरज कुमार और राजीव रंजन प्रसाद ने पार्टी कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा  पर  इस मुद्दे को लेकर तीखे सवाल दागे. 
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने न्यूज चैनल आज तक से कहा कि 'जमीन सौदे के लिए आठ नवंबर के आसपास राशि का ट्रांजेक्शन हुआ. प्रधानमंत्री ने  गोपनीयता का हवाला देकर नोटबंदी के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन अमित शाह से ये गुप्त जानकारी जरूर साझा की थी. इसलिए प्रधानमंत्री संसद आने से घबरा रहे हैं. काले धन को जेवरात और संपत्ति के रूप में छुपा लिया गया है. इन सबमें भाजपा का भी हाथ है और इसकी जानकारी प्रधानमंत्री को पहले से ही थी.इस बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “यह स्तब्ध कर देने वाला है. बीजेपी ने अपना पैसा ठिकाने लगा लिया. शर्मनाक.

Lalit Modi

भाजपा नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कार्यालय के लिए जमीन की खरीद में कोई गड़बड़ी नहीं है.  
नोटबंदी से इसका कोई लेना-देना नहीं है. पटना में अपनी जमीन पर पार्टी का कार्यालय तक नहीं है, जबकि कांग्रेस और अन्य दलों का कार्यालय अपनी जमीन पर है.\
कार्यालय के लिए जमीन की  खरीदारी का निर्णय पार्टी ने  दो माह पूर्व ही लिया था.
 इस मामले में जिसे हिसाब देना होगा दिया जायेगा. भाजपा समेत सभी पार्टियां एक-एक पैसे का हिसाब रिटर्न फाइल करती हैं और इसका ब्योरा चुनाव आयोग को दी जाती है.

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