राष्ट्रवाद और हिंदूवाद की आड़ में आखिर कब तक चलेगा हिंसा और भ्रस्टाचार का खेल ?-संजय सिंह




आप संजय सिंह & पीएम नरेंद्र मोदी 


आम आदमी पार्टी के राष्ट्रिय प्रवक्ता एव यूपी प्रभारी श्री संजय सिंह ने पीएम पर निशाना साधते हुआ कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा था ' बेटों को घर से बाहर जाने देते हो और बेटियों को रोकते हो ' उन्होने अपने इस वक्तव्य से देश के बेटियों की सुरक्षा के प्रति अपनी चिंता जाहिर की थी, पूरा देश भावुक हो गया था।  हमें लगा की प्रधानमंत्री जी बेटियों की सुरक्षा के प्रति चिंतित है और कुछ बड़े कदम उठाएंगे फिर उन्होंने ' बेटीबचाओ, बेटीपढ़ाओ ' का नारा दिया तो ऐसा लगा की प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी भारत की बेटियों के विकास और उन्नति के लिए वाकई गंभीर है ।






लेकिन केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक एक के बाद एक हो रही घटनाओं ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। बलिया के एक मजबूर बाप ने जिसकी बेटी की बीजेपी नेता के बेटे ने दिनदहाडे हत्या कर दी उसने असहाय होकर यहां तक कहा कि अगर बेटियों की सुरक्षा नही दे सकते तो भ्रूण हत्या की इजाजत दे दीजिए । उसके ये वाक्य देश के करोड़ो लोगों को ये सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हमारी सामाजिक, राजनैतिक और कानूनी व्यवस्था इतनी पंगु हो चुकी है कि बेटियों के बाप अपनी बेटियों को माँ के कोख में ही मारने को सोचने लगे हैं।






 यह वाक्य उत्तर प्रदेश के बलिया के उस मजबूर बाप के ही नही बल्कि देश की करोड़ों बेटियों के भी हैं जिनको कभी रास्ते में छेड़ा जाता है, कभी अपहरण किया जाता है,कभी अपने हवस का शिकार बनाया जाता है। तो कभी दरिंदगी से बलात्कार करके हत्या कर दी जाती है। लेकिन हमारी पूरी व्यवस्था, मीडिया तंत्र और राजनेता ऐसी घटनाओं पर बयानबाजी, अफसोस जताने की नौटंकी और कानूनी खानापूर्ति करके भारत के उन तमाम बेटियों की और उनके परिवारों की आवाज या तो दबा देते हैं या समय के साथ भूला देते हैं।





दिल्ली का दामिनी कांड शायद आपको याद होगा जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया । पूरा देश सड़कों पर आया । संसद में बहस भी हुई , सख्त कानून बनाने का भी दावा किया गया लेकिन फिर भी हालात नही बदले । छेड़खानी , बलात्कार और हत्याओं की घटनाएं बढ़ती रही । हम भी अखबारों में पढ़के अफसोस जताते रहे या कैंडल मार्च निकाल कर थोड़ा और संवेदनशीलता जाहिर करते रहे और थक-हार कर यह मान लिया की शायद अब कुछ भी बदलने वाला नही है, बेटियों पर अत्याचार जारी रहेगा ।






बलिया की घटना को देखकर आप एक मजबूर बाप के दर्द और असहनीय पीड़ा को समझ सकते हैं। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली उसकी #बेटी रोज स्कूल जाती थी । #बीजेपी नेता का बेटा अपने साथियों के साथ उस लड़की को छेड़ता परेशान करता था । जिसकी शिकायत पिता ने पुलिस से लेकर बिगड़ैल बेटे के बाप तक से की, लेकिन न ही पुलिस ने करवाई की न बीजेपी नेता ने कार्रवाई की ,चंडीगढ़ से लेकर बलिया तक बीजेपी नेताओं के बेटे कही किसी बेटी का अपहरण करने की कोशिश करते हैं, कहीं छेड़खानी करते हैं तो कहीं किसी की हत्या कर देते हैं और कानून को अपनी जेब में समझते हैं। इसलिए तो विकास बराला को 16 घण्टे में जमानत मिल जाती है फिर बाद में दबाव बनाये जाने पर गिरफ्तारी होती है। लेकिन बलिया का मजबूर बाप तो दबाव बनाने में भी नाकाम रहा, उसकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया और उसकी बेटी की हत्या कर दी गयी ।






उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद हमारे देश की महान मीडिया ने ऐसा माहौल बनाया जैसे कि उत्तर प्रदेश में राम राज्य आ गया हो । "ना भ्रस्टाचार - ना गुंडाराज अबकी बार बीजेपी सरकार " शायद आपको चुनाव के पहले का यह नारा याद होगा । लेकिन उत्तर प्रदेश में जबसे यह तथाकथित रामराज्य आया है पूरे प्रदेश में हत्या,लूट , बलात्कार,छेड़खानी की घटनाओं में बाढ़ सी आ गयी है । अपराध चरम पर है लेकिन सरकार और भाजपाई कभी मंदिर ,कभी मस्जिद, कभी गाय कभी तीन तलाक , कभी एन्टी रोमियो, कभी लव जिहाद औऱ कभी हिन्दुवाद तो कभी राष्ट्रवाद की जुमलेबाजी करके सब कुछ भूला देना चाहते हैं।






वह चाहते हैं की रोटी , कपड़ा ,मकान शिक्षा , चिकित्सा, किसानी, बेरोजगारी औऱ महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बात ही नही हो और मंदिर मस्जिद , हिन्दू-मुस्लिम के नकली नारों की आड़ में भाजपाइयों के सारे गुनाह माफ कर दिए जाएं । अगर इनके नकली नारों में फसकर अपने साथ और आस-पास होते रहे अपराध पर हम खामोश रहे तो बरबादी की आग हमारे घरों को भी जला देगी । फिर हम अपने आप को माफ नही कर पाएंगे और उसके लिये हम स्वंय जिम्मेदार होंगे ।





यूपी बलिया की घटना ने फिर से एक बार हम सब को सोचने के लिए मजबूर किया है कि आखिर हमारे देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी ? इसके लिए कानून के इस्तेमाल से ज्यादा सामाजिक चेतना की भी आवश्यकता है। अगर एन्टी रोमियो का ढोंग करने वाले भाजपाइयों के बेटे खुद बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करेंगे और कानून उनका बचाव करेगा तो शायद हर बाप को अपनी बेटी को हत्या से बचाने के लिए भ्रूण हत्या की मांग करने पर मजबूर होना पड़ेगा ।





मैं प्रधानमंत्री जी ,उनकी पार्टी और देश भर की सरकारों से अपील करता हूँ की बेटियों के सुरक्षा के लिए पूरे देश में एक सार्थक मुहिम चलाएं । कुछ ठोस कारवाई करके दिखाए, देश की अदालतों में पड़े महिला अपराध के मामले में न्याय की देरी को खतम करें, फ़ास्ट ट्रैक कोर्टों का गठन करें। महिला सुरक्षा पर खर्च में बढ़ोत्तरी करें और किसी भी रसूखदार व्यक्ति के सामने कानून को बौना साबित नही करें। इस सबसे ऊपर पूरे समाज को एकजुट होकर बेटियों की सुरक्षा का संकल्प लेना होगा और अपने आस-पास की घटनाओं पर मूकदर्शक बनने की बजाय जोरदार विरोध करना होगा और यह याद रखना होगा कि अगर बेटियां नही होंगी तो बेटे भी पैदा नही होंगे ।

संजय सिंह 
आम आदमी पार्टी 
(राष्ट्रिय प्रवक्ता )

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