कायरो का साथ देकर मोदी ने किया लोकतंत्र को शर्मसार : संजीव सिंह





आम आदमी पार्टी उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल प्रभारी संजीव सिंह गौरी लंकेश की हत्या पर प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि " गौरी लंकेश '' की हत्या के विरुद्ध पूरे देश का प्रबुद्ध समाज नारी स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इत्यादि पर किंकर्तव्यविमूढ हो गया है। आखिर क्या सवाल पूछने या व्यवस्था पर सवाल करने मात्र से सवालकर्ता की हत्या हो जायेगी अरे हत्यारो क्यों नहीं समझते व्यक्ति मर सकते या मार सकते हो सवाल थोड़ी कभी नहीं  मरेगा। आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का एक एक नागरिक शर्म महसूस कर रहा है ! कि उसका प्रधानमंत्री एक महिला पत्रकार की हत्या पर एक '' नामर्द के अभिव्यक्ति  जब वह गौरी की हत्या पर कुतिया कहता है तो हमारे प्रधानमंत्री उसका अनुसरण " फालो " करते है।"







आप सब सोचो आज एक गौरी मरी है लेकिन अभिव्यक्ति की मजबूत हस्ताक्षर उसकी लेखनी,कलम नहीं मरी है फिर कोई लिखेगा,सवाल करेगा क्या तब भी आप जागोगे के नहीं ? सिर्फ इतना मानता हूँ हत्या, गोली, हिंसा ये कायरो के हथियार है। जो अपनी लाचारी का दर्शन दे रहें है। आखिर क्या लोकतंत्र के पैमाने बदलने पर ये सरकार काम कर रही है ? लंकेश को पहला उदाहरण नहीं है इसके पहले भी कल्बुरगी, डाभोलकर,पंसारे की हत्या हुई तब भी वो सरकार उतनी ही जिम्मेदार रही जितनी आज हम इस घटना पर क्षोभ व्यक्त कर रहे है। इस देश में ऐसी हत्या अर्थात एक निष्पक्ष पत्रकार की हत्या जो किसी सरकार का या दल का मुलाजिम नहीं होता बल्कि सरकार की जनहित में कि गयी उपलब्धियों का गुणगान करती है तथा नाकामियो पर सरकार के तंत्र पर प्रहार करती है कि आप जनतंत्र का हित सुरक्षित रखो। आखिर ऐसा क्या लिखा गौरी ने यही न कि झूठी खबरों के द्वारा पत्रकारिता को कमजोर किया जा रहा है जिससे गलत संदेश जनमानस में जा रहा है।






आज प्रधानमंत्री जी यदि इस हिंसा पर कड़ी निन्दा के साथ कारवाई की बात करते तो देश खड़ा होता लेकिन नहीं सत्ता से अगली सत्ता का अंधा प्रेम उन्हें ये नहीं करने दे रहा।इसी पर कहना ज्यादा उचित लगता है कि यदि यू.पी.ए. की सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री  मनमोहन सिंह गाँधी पर से रिमोट संचालित थे तो आज मोदी जी संघ परिवार से संचालित " रोबोट " है।  याद रखियेगा हमेशा ये देश भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, गाँधी, भगतसिंह, लोहिया की धरती है। जो मर्यादा, न्याय, अहिंसा, सत्य, त्याग और बलिदान के रास्ते पर चलने का आदर्श मार्ग प्रशस्त किया है। इन्हीं के दिखाये मार्ग पर चलेगी। किसी हिटलर, मुसोलनी या संप्रदायिकता के सिद्धांत पर नहीं जहाँ गोड्से पैदा होता हो।






ये कितने गोडसे तैयार करेंगे गांधी के विचारों को खत्म करने के लिये। गांधी हत्या करोड़ो गांधी बना गयी। विचार कभी नही खत्म होता है । ये कब समझेंगे ? आप किसी को भी नही डरा सकेंगे। जिसे गोली मार दी वो अपने आखिरी वक़्त तक मे ना डरे और आप चले है उनके विचार खत्म करने। क्योंकि आपके पास ना तो विचार हैं। साझा करने के लिये ना कोई तर्क अपनी बात को साबित करने के लिये।





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