राजनीति के ज़हरख़ुरानी गिरोह से सावधान : रविश कुमार


NDTV
वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार 


रविश कुमार कहते है कि महाराष्ट्र के यवतमाल में कीटनाशक के ज़हर से बीस किसानों की जान चली गई है। आठ सौ किसान अस्पताल में हैं। ठारह सौ किसान ज़हर से प्रभावित हुए हैं। जिसने ज़हर पी उसकी कोई बात नहीं। उन्हें यह भी कहने का मौका नहीं मिला कि वे शिव के उपासक थे।




प्रधानमंत्री ने अपने गाँव वडनगर के दौरे पर कहा कि "भोले बाबा के आशीर्वाद ने मुझे ज़हर पीने और उसे पचाने की शक्ति दी। इसी क्षमता के कारण मैं 2001 से अपने खिलाफ विष वमन करने वाले सभी लोगों से निपट सका।  इस क्षमता ने मुझे इन वर्षों में समर्पण के साथ मातृभूमि की सेवा करने की शक्ति दी।"

हमारे नेता ख़ुद को विक्टिम यानी पीड़ित की तरह पेश करते रहते हैं। जैसे संसार के सबसे पीड़ित शख़्स वही हों। विपक्ष में रहते हुए 'पीड़ितवाद' तो थोड़ा बहुत चल जाता है मगर सोलह सत्रह साल तक सत्ता में रहने के बाद भी इसकी ज़रूरत पड़े, वो भी किसी शक्तिशाली नेता को, ठीक नहीं है।
पिछले चार साल की भारतीय राजनीति में ज़हर का ज़िक्र सबसे पहले राहुल गांधी ने किया था। जयपुर में। उसके बाद लालू यादव ने किया बिहार विधान सभा चुनाव में।


जनवरी 2013 में जयपुर में उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा था। पिछली रात मेरी मां मेरे पास आई और रो पड़ी क्योंकि वो जानती हैं कि सत्ता ज़हर की तरह होती है। सत्ता क्या करती है। हमें शक्ति का इस्तेमाल लोगों को सबल बनाने के लिए करना है।


जून 2015 में नीतीश कुमार के साथ गठबंधन करते हुए लालू यादव ने कहा था कि मैं धर्मनिरपेक्ष ताक़तों और भारत की जनता को भरोसा दिलाता हूँ कि बिहार की लड़ाई में मैं हर तरह का घूँट पीने को तैयार हूँ। हम हर तरह का घूँट पीने को तैयार हैं। हम हर तरह का ज़हर पीने को तैयार हैं। मैं सांप्रदायिकता के इस कोबरा को कुचलने के लिए प्रतिबद्ध हूँ । 



भारत की राजनीति में लगता है कि हर दो साल बाद कोई नेता ज़हर का ज़िक्र ज़रूर करता है। कोई कोबरा को कुचलने के लिए ज़हर पी रहा है तो कोई ख़ुद को शिव की छाया में रखने के लिए ज़हर पी रहा है। मेरे प्रिय आराध्य शिव तो सबका ही ज़हर पी रहे हैं। ज़हर पीने वाले का भी ज़हर पी रहे हैं और पीलाने वाले का भी। भोले तो बस भोले बने रहते हैं । वे जान गए हैं कि उन्हें भारत की राजनीति में प्रतीक बनाया जा रहा है। धीरे धीरे यह प्रतीक बड़ा होगा और नेता की छवि में भोले की छवि गढ़ी जाएगी। मेरे नीलकंठ जानते हैं , संसार में हर पक्षी नीलकंठ नहीं होता है। सत्ता के अमृत को शिव का ज़हर बताना ठीक नहीं ।



भारतीय राजनीति में कोई ज़हरख़ुरानी गिरोह तो नहीं है जो सबको ज़हर पीला रहा है! पहले इस गिरोह को पकड़ो। तब तक स्कूल, कॉलेज और अस्पताल की बात कीजिए जिसके न होने पर जनता रोज़ ज़हर पीती है। आप नेता हैं, आप ज़हर पी कर भी बच सकते हैं। यवतमाल के किसान तो मर गए। उन्होंने तो नेताओं की झूठ का ज़हर पीया।


आप नेता लोग मलाई खाने के लिए, मलाई खाकर और मलाई खाते रहने के लिए थोड़ा सा ज़हर पी रहे हैं। जनता तो जीने से बचने के लिए ज़हर पी रही है।

0/Post a Comment/Comments

Thanks For Visiting and Read Blog

Stay Conneted