हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि जजों ने अपनी आत्मा बेच दिया : जस्टिस चेलामेश्वर


जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई 

 सुप्रीम कोर्ट के चार जज दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।  देश की शीर्ष अदालत में शुक्रवार को एक असाधारण स्थिति देखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया से बात कर शीर्ष अदालत के प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 


एक अप्रत्याशित क़दम उठाते हुए न्यायमूर्ति चेलामेश्वर और तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों ने उच्चतम न्यायालय के न्यायतंत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।  प्रेस सम्मेलन में न्यायमूर्ति चेलामेश्वर के अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ मौजूद रहे। 

देश के उच्चतम न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि चारों वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने अपनी आत्मा बेच दिया था।  इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया है। भारत समेत किसी भी देश में लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाये सही ढंग से काम करे ताकि लोकतंत्र पर किसी प्रकार का आंच न आये। 




चूंकि हमारे सभी प्रयास बेकार हो गए, यहां तक कि आज सुबह भी हम चारों जाकर चीफ़ जस्टिस से मिले, उनसे आग्रह किया. लेकिन हम अपनी बात पर उन्हें सहमत नहीं करा सके. इसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा कि हम देश को बताएं कि न्यायपालिका की देखभाल करें। 


न्यायाधीश जे. चेलामेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय का प्रशासन ‘सही नहीं चल रहा’ और बहुत सी ऐसी चीज़ें हुई हैं जो नहीं होनी चाहिए थीं। कई बार उच्चतम न्यायालय के प्रशासन में सब कुछ सही नहीं होता और बहुत सी ऐसी चीज़ें हुई जो नहीं होनी चाहिए थी। 

संवाददाता सम्मेलन यहां उनके तुग़लक़ रोड स्थित आवास पर आयोजित किया गया। २३ जून 1953 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर केरल और गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। मद्रास लोयला कॉलेस से भौतिकी विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने 1976 में आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद में वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने थे। २००७ में उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था।  बाद में उनका तबादला केरल हाईकोर्ट कर दिया गया।  अक्टूबर 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। 


आधार, अभिव्यक्ति की आजादी और जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (एनजेएसी) को लेकर उन्होंने बेबाक राय रखी है। 

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